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ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा नियमों को किया कड़ा

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने एक या उससे ज्यादा थर्ड पार्टी कार्यस्थलों पर काम करने वालों के लिए एच-1बी वीजा जारी करने की प्रक्रिया कड़ी कर दी है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित नई नीति से सबसे ज्यादा भारतीय आइटी कंपनियां और उनके कर्मचारी प्रभावित होंगे।
एच-1बी कार्यक्रम के तहत अमेरिका अस्थायी वीजा प्रदान करता है। यह कंपनियों को दक्ष अमेरिकी कामगारों का अभाव वाले क्षेत्रों में कुशल विदेशी पेशेवर कामगारों को काम पर लेने की अनुमति देता है।

एच-1बी वीजा का सर्वाधिक लाभ भारतीय आइटी कंपनियां उठाती हैं। भारतीय आइटी कंपनियों के पास बड़ी संख्या में थर्ड पार्टी कार्यस्थल पर तैनात कर्मचारी हैं। कई अमेरिकी बैंक, ट्रैवल और व्यापारिक संस्थान अपने काम के लिए भारतीय आइटी कामगारों पर आश्रित हैं।

नई नीति की घोषणा एक दिन पहले गुरुवार को की गई। सात पृष्ठों में जारी नीति में अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआइएस) को एच-1बी वीजा जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है। यूएससीआइएस एक कर्मचारी को एक खास अवधि के लिए एच-1बी वीजा प्रदान करेगा जिसमें वह थर्ड पार्टी कार्यस्थल पर काम कर सकेगा।

घोषित नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘बाइ अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन एग्जिक्यूटिव आर्डर’ का हिस्सा है। यूएससीआइएस ने कहा है कि यह अमेरिकी कामगारों के हितों की सुरक्षा के निर्देश के अनुसार है। एच-1बी वीजा तीन साल से कम अवधि के लिए दिया जा सकता है।

पूर्व में तत्काल ही तीन साल के लिए वीजा जारी किया जाता था। यह उस परंपरा के विपरीत है। तत्काल प्रभाव से लागू नया दिशानिर्देश एच-1बी वीजा का सत्र शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले जारी हुआ है। एक अक्टूबर 2018 से शुरू होने जा रहे 2019 वित्त वर्ष के लिए नया सत्र दो अप्रैल से शुरू होने की संभावना है।

क्या कहती है नई नीति
यूएससीआइएस ने कहा है कि नियोक्ता को थर्ड पार्टी कार्यस्थल पर काम करने वाले कर्मचारी के लिए अनिवार्य रूप से करार और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना होगा। निर्देश के मुताबिक, थर्ड पार्टी कार्यस्थल के लिए एच-1बी वीजा आवेदन मंजूरी के लिए आवेदक को यह दिखाना होगा कि लाभ पाने वाले को एक विशेष काम में नियुक्त किया जाएगा। जिस अवधि के लिए वीजा देने का आग्रह किया गया है उसके दौरान नियोक्ता को लाभ पाने वाले के साथ नियोक्ता-कर्मचारी रिश्ते को बनाए रखना होगा। यह शर्त तमाम लोगों के लिए मुश्किल साबित हो सकती है।

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