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उत्तर कोरिया से युद्ध के खिलाफ चिनफिंग और पुतिन

टोक्यो। कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका और उसके मित्र राष्ट्रों के युद्धाभ्यासों के बीच चीन और रूस ने युद्ध के खतरों से आगाह किया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बीजिंग में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई-इन से वार्ता में किसी भी स्थिति में उत्तर कोरिया से युद्ध न होने पर जोर दिया। कहा कि समस्या का समाधान बातचीत से निकाला जाए। जबकि रूस के राष्ट्रपति ने कहा है कि युद्ध के परिणाम प्रलयंकारी हो सकते हैं, इसलिए उससे हर संभव तरीके से बचा जाए।

जापान पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने कहा, क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों का खात्मा जरूरी है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को पूरी गंभीरता के साथ लागू करना होगा। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी से मुलाकात के बाद गुतेरस ने कहा, भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत के लिए परमाणु निशस्त्रीकरण मुख्य मुद्दा होना चाहिए।

उत्तर कोरिया पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करे, इसके बाद ही उससे बात शुरू की जाए। यह उत्तर कोरिया के भी हित में होगा और उसके खिलाफ खड़े देशों के हित में भी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के उत्तर कोरिया के साथ बिना शर्त वार्ता के प्रस्ताव पर कही। इस प्रस्ताव का रूस और चीन ने भी स्वागत किया है। गुतेरस ने कहा कि सुरक्षा परिषद की एकजुटता बहुत मायने रखती है। उसी से कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार रहित बनाने का रास्ता खुलेगा।

प्रधानमंत्री एबी ने कहा, यह समय प्योंगयांग पर अधिकतम दबाव बनाने का है, न कि उससे बातचीत शुरू करने का। उन्होंने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त क्षेत्र बनाने से कम शर्त पर कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के तौर पर जेफ्री फेल्टमैन ने उत्तर कोरिया का दौरा किया था लेकिन वह प्रतिबंधित देश के नेताओं को हथियारों के विकास का रास्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं कर पाए।

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